Sunday, July 22, 2012

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में सफलता के लिए किन बातों का रखें ध्यान।

हर साल हज़ारों छात्र उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाते हैं और इन छात्रों की सफलता का स्तर जाहिर तौर पर अलग-अलग होगा। अमेरिका में पिछले 10 सालों में मुझे चार शैक्षणिक संस्थानों पेन्सिलवैनिया स्टेट यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ मिज़ूरी, यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का, ओमाहा और बिंगहैम्टन यूनिवर्सिटी, स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू यॉर्क में पढ़ाने संबंधी काम करने के अवसर मिले। इन दस सालों में मैंने हज़ारों छात्रों से बात की और अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचने के लिए भारतीय छात्रों की तैयारियों को भी नज़दीक से देखा।
अमेरिका में मैंने उच्च शिक्षा ग्रहण की और बतौर टीचिंग असिस्टेंट, लेक्चरर और प्रोफेसर का काम करते हुए मैं इस नतीजे पर पहुंच पाया कि अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने आने वाले छात्रों की तैयारी और मेहनत कॉलेज की पहली क्लास से काफी पहले शुरू हो जाती है। मैंने इस पूरी प्रक्रिया को (5 + 2) पी फ्रेमवर्क नाम दिया है। (5 + 2) पी का अर्थ है प्लान, प्रिपेयर, पार्टिसिपेट, प्रोएक्ट और पर्सपेक्टिव। अंतरराष्ट्रीय परिवेश में सफलता के लिए दो और पी मददगार होंगे जो हैं प्राइड और पर्सपेक्टिव।

अध्ययन कौशल

पूर्व में सफलता हासिल करने वाले छात्रों को लग सकता है कि दूसरे देश में भी सफलता उतनी ही सहज होगी। लेकिन पढ़ाने के अलग तरीकों, अलग भाषा, अलग अकादमिक पृष्ठभूमि और परिसर की अलग संस्कृति के चलते आपके सफल होने की संभावना पर असर पड़ सकता है।
ज़्यादातर कॉलेज और विश्वविद्यालय छात्रों की सफलता के लिए कुछ लघुकालिक पाठ्यक्रम नि:शुल्क संचालित करते हैं। इनके विषयों में अपना शोध पत्र लिखने के लिए अपने संस्थान के पुस्तकालयी संसाधनों का इस्तेमाल, इंटरनेट संसाधनों का प्रयोग, अध्ययन के अच्छे तौरतरीके विकसित करना और प्रभावी समय प्रबंधन शामिल है। यदि अंग्रेज़ी आपकी प्रथम भाषा नहीं है तो आप विश्वविद्यालय के लेखन केंद्र जाकर, ईएसएल पाठ्यक्रम लेकर, या फिर अनौपचारिक अंग्रज़ी वार्तालाप समूह में शामिल होकर अपने ग्रेड बेहतर कर सकते हैं। इंटरनेट पर अध्ययन कौशल से संबंधित बढि़या वेबसाइट भी हैं।
स्रोत: एजुकेशन यूएसए पुस्तिका "यदि आप अमेरिका में पढ़ना चाहते हैं।" Photograph © Getty Images

फोटोग्राफ © गेट्टी इमेजेज

योजना: अमेरिकी कॉलेज में दाखिला लेने के बाद आप अपना मुख्य विषय चुनते हैं। आपको अपने मुख्य विषय से संबंधित कारगर कार्ययोजना बनानी होगी। आपके प्रोफेशनल और शैक्षणिक लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपने मुख्य विषय की उपयोगिता और अन्य विषयों की भूमिका को समझना आपके लिए अहम होगा। चूंकि विदेशी छात्रों को अमेरिका में एक तय समय सीमा में अपनी पढ़ाई खत्म कर लेनी होती है इसलिए यहां के कॉलेजों में उपलब्ध कई विकल्पों को इस्तेमाल करने का दायरा कम हो जाता है। इस स्थिति में जो छात्र अपने पाठ्यक्रम में विषयों को चुनने में सतर्कता बरतते हैं उन्हें सफलता मिलती है।
तैयारी: अमेरिकी विश्वविद्यालयों में सेमेस्टर की शुरुआत में ही छात्रों को पाठ््यक्रम उपलब्ध करा दिया जाता है। सेमेस्टर शुरू होने से पहले भी विद्यार्थी अपने प्रोफेसर से पाठ्यक्रम की मांग कर सकते हैं। इसमें पढ़ाए जाने वाले विषयों के बिंदु, किताबों के नाम, टेस्ट और दिए गए काम को खत्म करने की तारीखें दे दी जाती हैं। यह जानकारी पाठ्यक्रम की तैयारी के लिए लाभकारी होती है।
भागीदारी: अमेरिकी कॉलेजों में कैंपस और क्लास में होने वाली सभी शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा लेना आपके व्यक्तित्व के विकास के लिए जरूरी है। प्रोफेसर अक्सर यही उम्मीद करते हैं कि छात्र कक्षा में चर्चा के दौरान अपने विचार रखें और चर्चा को आगे बढ़ाने में योगदान दें। अगर छात्र विषय पर कई किताबों का अध्ययन कर रहे हैं तो पाठ्यक्रम से अतिरिक्त ज्ञान को वे अपने प्रोफेसर के सामने रखें ताकि उनकी प्रतिभा का सही परिचय मिल सके। यदि छात्र नौकरी कर चुके हैं तो अपने काम के अनुभव को भी बांटे। इससे एक सकारात्मक छवि बनाने में मदद मिलती है। अमेरिका जाने वाले छात्रों के पास नौकरी का अनुभव नहीं होता। ऐसे में विषय का विस्तृत अध्ययन मददगार साबित होता है।
पहल करें: भारतीय छात्रों में अक्सर किसी भी विषय पर पहल करने की प्रवृत्ति कम देखी जाती है। अमेरिकी छात्रों से सिर्फ प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं की जाती बल्कि नेतृत्व क्षमता रखने वाले छात्रों को बेहतर समझा जाता है। प्रोएक्टिव होने का एक तरीका है नेटवर्किंग। अपने सहपाठियों, प्रोफेसर, पूर्व छात्रों और कैंपस में मौजूद अन्य लोगों से संवाद कायम करना और उसे जारी रखना जरूरी होता है। नेटवर्किंग के लिए व्यक्तिगत मेलजोल के अलावा इंटरनेट पर फेसबुक, लिंक्डइन आदि वेबसाइट से जुड़ा होने के अलावा कैंपस में होने वाली गतिविधियों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए। असिस्टेंटशिप, इंटर्नशिप और नौकरियों के अवसर बेहतर नेटवर्किंग करने वालों को आसानी से मिल जाते हैं।
अपनी प्रतिभा दिखाएं: नियमित तौर पर पढ़ना ही काफी नहीं, आज के परिवेश में उपलब्धियों का प्रचार भी जरूरी है। बेहतरीन प्रदर्शन के बावजूद आपकी उपलब्धियों के लिए आपको अगर श्रेय न मिले तो समझिए कि आपका काम अधूरा है। पढ़ाई के अलावा अन्य प्रतिभाओं के बारे में छात्र अपने प्रोफेसर को जानकारी दे सकते हैं। अपने रेज्यूमे को भी समय-समय पर अपडेट करते रहें। इससे आप खुद अपना आकलन कर पाएंगे।
अपने पर गर्व: अपने देश और संस्कृति पर हर छात्र को गर्व करना चाहिए। मैं ऐसे कई छात्रों को जानता हूं जो अपने देश और संस्कृति का मज़ाक उड़ाते हैं। वे शायद ये नहीं जानते कि इससे वे अपनी ही छवि खराब कर रहे हैं। मैं छात्रों को अक्सर सलाह देता हूं कि वे अपने मूल्यों और देश के बारे में जानें।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता का दूसरा मंत्र है परिप्रेक्ष्य। वैश्वीकरण के समय में भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय प्ररिपेक्ष्य विकसित करना चाहिए। इसके लिए छात्र विदेशी भाषा सीखें, दूसरे देशों के इतिहास और समाज के बारे में जानकारी हासिल करें। आज मुंबई या दिल्ली में बैठे छात्रों की प्रतियोगिता सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं रह गई, बल्कि शंघाई, रियो, पेरिस और न्यू यॉर्क में बैठे विदेशी छात्रों से भी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियां ऐसे लोगों को नौकरी देती हैं जिनमें वैश्विक स्तर पर काम करने की क्षमता और समझ देख पाती हैं।
ऊपर बताया गया (5 + 2) पी फ्रेमवर्क मेरे व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर है और ये मेरे निजी विचार हैं। इन्हें छात्र एक संपूर्ण गाइड की तरह न मानें, लेकिन वे नौजवान जो नई दिशा में बढ़ना चाहते हैं उनके लिए ये बातें मार्गदर्शक हैं। यह फ्रेमवर्क विदेश के अपरिचित माहौल में लक्ष्य हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण सूत्र है, जहां एक गलत कदम समय और पैसे का भारी नुकसान करा सकता है। वहीं सही दिशा में बढ़े कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपके कॅरियर को ऊंची उड़ान देंगे।

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